Jayant Chaudhary: खतौली से मिले जीत के ‘गुड़’ में ‘भाईचारा’ बढ़ाएगा मिठास? जयंत चौधरी ने फिर शुरू किया सम्मेलनों का दौर – jayant chaudhary restart bhaichara sammelan after khatauli assembly election victory

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लखनऊ : मुजफ्फरनगर के खतौली विधानसभा उपचुनाव में खतौली की जीत से रालोद ने क्या हासिल किया, यह खुद उसके मुखिया जयंत चौधरी के मुंह से सुनिए। रविवार को मुजफ्फरनगर में ‘भाईचारा जिंदाबाद’ सम्मेलन में जयंत ने कहा, ‘खतौली की जनता को सलाम। आपने वह कर दिखाया जो बहुत लोगों की नजर में असंभव था।’ इस ‘असंभव’ से लगने वाली जीत के ‘गुड़’ की मिठास को और बढ़ाने की उम्मीद जयंत ने भाईचारा सम्मेलनों से जोड़ी है। सपा के साथ मिलकर रालोद की कोशिश अपने उस जाट-मुस्लिम वोट बैंक की पूंजी फिर हासिल करने पर है जिसे 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त भाजपा ने छीन लिया था।

…इसलिए जगीं हैं उम्मीदें
खतौली की जीत के बाद पश्चिम में रालोद 2024 के लोकसभा चुनाव में उम्मीदों का ‘पूरब’ यूं ही नहीं देख रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा-रालोद गठबंधन हार के बाद भी मुजफ्फरनगर जिले की 6 में 4 विधानसभा सीटें जीतने में सफल रहा था। 2014 में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की प्रयोगशाला बने इस जिले के नतीजों ने रालोद के लिए संभावनाओं व भाजपा के लिए चिंता के दरवाजे खोल दिए थे। खतौली जीतने के बाद विपक्षी गठबंधन के खाते में अब जिले की 6 में 5 सीटें हैं। यहां के संकेत इसलिए भी अहम हैं क्योंकि भाजपा ने यहां दंगे को मुद्दा बनाया था लेकिन जिस नंगला मंदौड़ में दंगे को लेकर पंचायत हुई थी, भाजपा वहां का बूथ भी हार गई। जाट बहुल गांवों में भी रालोद उम्मीदवार को बढ़त मिली। मुस्लिमों का परंपरागत वोट पहले की तरह उनके साथ रहा। इसलिए जयंत को एक बार फिर अपने पुराने समीकरण सधने की संभावना लग रही है। उपचुनाव में जयंत खुद 50 गांवों में घूमे थे, कुछ गांवों में वोटरलिस्ट की पर्चियां तक बांटी थी। इससे मिले नतीजे के बाद अब पार्टी ने नए साल में भाईचारा सम्मेलन के साथ ही ‘समरसता’ अभियान शुरू करने का फैसला किया है। जयंत ने अपने लिए भी 1500 गांव तय किए हैं।

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भाईचारा सम्‍मेलन में जमा भीड़

नजर मुजफ्फरनगर की डगर पर भी
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-गठबंधन बना रहा तो रालोद मुजफ्फरनगर पर स्वाभाविक तौर पर दावा ठोंकेगा। नए समीकरणों में उसे यहां की डगर की बेहतर नजर आ रही है। 2014 के लोकसभा चुनाव में करीब 4 लाख वोट से जीत हासिल करने वाले भाजपा के संजीव बालियान 2019 में महज 6 हजार वोटों से ही सीट बचा पाए थे। इस लोकसभा में चरथावल, बुढ़ाना, सरधना, खतौली और मुजफ्फरनगर सदर विधानसभा आती हैं। 2019 में सदर, खतौली व सरधना भाजपा के और चरथावल व बुढ़ाना में रालोद को बढ़त मिली थी। भाजपा को मिली बढ़त मामूली थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा-रालोद ने इसमें से तीन विधानसभा चरथावल, बुढ़ाना, सरधना अपने खाते में डाल ली थी। अब खतौली भी उनके खाते में आ गई हैं। दंगे की मंद पड़ी आंच के संकतों को देखते हुए रालोद ने वेस्ट यूपी में जमीनी सक्रियता तेज कर दी है। जिससे जाट-मुस्लिम बेल्ट में 2024 में दावेदारी मजबूत की जा सके। भाईचारा व समरसता सम्मेलन इसी रणनीति का हिस्सा हैं।

मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट पर उपचुनाव में रालोद को मिली जीत के बाद रविवार को भाईचारा सम्मेलन का आयोजन किया गया था, इसमें रालोद प्रमुख जयंत चौधरी पहुंचे थे।



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