मध्य प्रदेश में क्या और क्यों पढ़ रहे हैं हिंदू बच्चे ? राज्य सरकार ने दिये पाठ्यक्रम की जाँच के आदेश

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इसके अलावा बाल संरक्षण आयोग के दतिया जिले में किये गये दौरे में पता चला कि मदरसे में 38 फीसदी बच्चे हिंदू समुदाय के पढ़ रहे हैं। इसके बाद आयोग ने दतिया के कलेक्टर को नोटिस जारी कर मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।

मध्य प्रदेश के मदरसों में हिंदू बच्चों के पढ़ने और उन्हें विवादित बातें पढ़ाये जाने का मुद्दा गर्मा गया है क्योंकि अब राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा है कि राज्य के कुछ मदरसों में पढ़ाई जा रही कथित आपत्तिजनक सामग्री की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ मदरसों में आपत्तिजनक सामग्री पढ़ाए जाने का मामला उनके संज्ञान में लाया गया है। नरोत्तम मिश्रा ने कहा, ‘‘मैंने भी उसको (आपत्तिजनक सामग्री को) प्रथम दृष्टया सरसरी निगाह से देखा है। इस तरह की किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए, हम मदरसों की जो पठन सामग्री है, उसे जिलाधिकारियों से कहकर संबंधित शिक्षा विभाग से इसकी जांच कराने तथा पठन सामग्री व्यवस्थित रहे यह व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहेंगे।’’ 

हम आपको बता दें कि कुछ वर्गों ने राज्य के कुछ स्थानों पर मदरसों में पढ़ाए जाने वाले कुछ विषयों पर सवालिया निशान खड़े किए हैं। हाल ही में खबर आई थी कि मध्य प्रदेश में मदरसे का औचक निरीक्षण करने पहुंचे राज्य बाल संरक्षण आयोग के हाथ एक किताब लगी है, जिसका नाम है- तालीमुल इस्लाम। बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. निवेदिता शर्मा और ओंकार सिंह कुछ दिन पहले विदिशा के तोपपुरा की तंग गलियों में स्थित मरियम मदरसे में निरीक्षण करने पहुँचे थे क्योंकि उन्हें शिकायत मिली थी कि वहां हिंदू बच्चों को भी पढ़ाया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक मदरसे में हिंदू बच्चों के नाम के आगे सरनेम लिखा हुआ नहीं मिला। साथ ही इन बच्चों को पढ़ाया जा रहा था कि मुश्रिकों को बख़्शा नहीं जाएगा। रिपोर्टों के मुताबिक इस पुस्तक के माध्यम से पढ़ाया जा रहा था कि पूरी दुनिया में इस्लाम से बड़ा कोई मजहब नहीं है और अल्लाह से बड़ा कोई भगवान नहीं है। इस पुस्तक में कहा गया है कि जो अल्लाह को नहीं मानें वह काफिर और मुश्रिक है। उल्लेखनीय है कि ऐसा माना जाता है कि अल्लाह और इस्लाम को नहीं मानने वाले तमाम मत, पंथ और संप्रदाय अथवा धर्म के लोग मुश्रिक हैं।

इसके अलावा राज्य बाल संरक्षण आयोग के दतिया जिले में किये गये दौरे में पता चला कि मदरसे में 38 फीसदी बच्चे हिंदू समुदाय के पढ़ रहे हैं। इसके बाद आयोग ने दतिया के कलेक्टर को नोटिस जारी कर मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रकार की रिपोर्टें हैं कि जिला प्रशासन की शुरुआती जाँच में सामने आया है कि कुछ बच्चे उर्दू सीख रहे थे। जांच में यह भी सामने आया कि इन हिंदू बच्चों का दाखिला पहले सरकारी स्कूल में हुआ था लेकिन वहां वह कोई दस्तावेज नहीं पेश कर सके जिसके बाद उन्हें वहां से निकाल दिया गया और वह छोटे से कमरे में चलाये जा रहे मदरसे में आकर पढ़ने लगे। हालांकि अभी इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है।

हम आपको यह भी बता दें कि इस साल अगस्त में मध्य प्रदेश की संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर ने कहा था कि अवैध रूप से संचालित मदरसों का मानव तस्करी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है और ऐसी जगहों की जांच की जानी चाहिए। उषा ठाकुर ने आरोप लगाया था, ‘‘बाल आयोग के पदाधिकारियों ने हाल में ऐसे अवैध रूप से संचालित मदरसों का औचक निरीक्षण किया था। उन्होंने पाया कि 30-40 बच्चों को स्वस्थ वातावरण के बिना रखा गया। वहां भोजन की अपर्याप्त व्यवस्था थी।” उन्होंने कहा था कि मुझे डर है कि यह मानव तस्करी का मामला हो सकता है।’’ 

इसके अलावा मदरसों और मिशनरी स्कूलों में हिंदू बच्चों को पढ़ाने के नाम पर धर्मांतरण का आरोप भी कई बार लग चुका है। भाजपा का आरोप है कि आदिवासी चूंकि गरीब होते हैं इसलिए उन्हें बहला-फुसला कर धर्मांतरित कर लिया जाता है। इस समय मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र चल रहा है जहां इस मुद्दे के उठाये जाने की संभावना है।

-गौतम मोरारका



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