OMG: भारत का एक ऐसा गांव, जहां पर सभी लगाते हैं एक ही सरनेम; जानें माजरा क्या है?

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नगौर. देशभर में कई स्थान अपनी खासियतों की वजह से जाने-पहचाने जाते हैं. उदाहरण के तौर पर बात करें तो सपनों का शहर मुम्बई, कीनू का शहर गंगानगर या देश की इलेक्ट्रॉनिक राजधानी बंगलौर हैं. उसी प्रकार से नागौर के एक छोटे से गांव ईनाणियां में रहने वाले वाले सभी लोग जैसे कुम्हार, मेघवाल, सेन, जाट, व राजपूत समाज के लोग अपने नाम के पीछे सरनेम ईनाणियां लगाते हैं.

खेड़ा धणी की वजह से इजात हुआ ईनाणियां सरनेम
गांववासियों ने बताया किके शासक सीड दे के समय नागौर के राजा सोभराज की समय पर यहां पर लूट हुई. तब सीड दे सेनापति तेतरखान व उनके सरणी द्वारा मुक्ता यानि लगान नही देने पर सोभराज की गायें ले गयें. उस समय खेड़ा धणी हालुहरपाल सिंह जी झामासणी खेड़ा से बाहर गये हुऐ थें. जब हालुहरपाल सिंह घर आये तो माता व पिता उन्हें यह वार्ता सुनाई.

हालुहरपाल सिंह ने अपनी कुल देवी दधिमती माता याद करके अपना शीश काटकर अपनी माता को दे दिया और अपनी गायों को वापस लाएं. लेकिन माता नें बेटे के देरी से आने के कारण शीश जमीन पर गिर गया इसी कारण से खेङा धणी वीरगति को प्राप्त हऐं. यह एक धार्मिक मान्यता है न्यूज 18 इसकी पुष्टि नही करता हैं.

1358 में 12 खेड़ो से मिलकर बना ईनाणा गांव
ग्रामीणों ने बताया कि 1358 मे राजा शोभराज के बेटे इंदरसिह ने 12 खेड़ों को मिलाकर यानि की बाहर प्रकार की जातियां थी तब उन पर हुऐ जुर्म के द्वारा लोगों ने मिलकर संगठन बनाया वहां से सभी जाति के लोगो द्वारा ईनाणा गांव बसाया और ईनाणियां सरनेम लगाना शुरू कियां. जिससे किसी भी जाति में भेदभाव नही हो. इदरसिंह की वजह सें ईनाणा गांव बसा. यह दो भाई थे. इनरे एक भाई गायों की रक्षा करते हुऐ शहीद हो गयें जिन्हें बाद में लोगों द्वारा कुलदेवता के रूप में पूजन लेगे जिन्हें खेड़ा धणी के नाम से जाना जाता हैं.

सभी व्यक्ति लगाते एक ही सरनेम व यहां पर स्थित है गांव
इस गांव वर्तमान समय में 4400 से अधिक वोटर हैं यानि इस गांव में निवासी करने वाली सभी जाति के लोग नायक, मेघवाल, जाट, राजपूत, तेली, महाजन, ब्रह्राणं व गोस्वामी अपने पीछे सरनेम ईनाणियां लगाते हैं. यह गांव नागौर से 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं. जो हिन्दु व मुस्लिम समाज को एक ही धागे या सदभावना में पिरोता हैं.

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FIRST PUBLISHED : December 19, 2022, 17:39 IST



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