पाकिस्तान ने आतंकवाद रूपी जो सांप पाला था, वो अब उसे ही काटने लग गया है

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पाकिस्तान सरकार ने बातचीत के जरिये मामला सुलझाने की कोशिश की लेकिन आतंकवादी नहीं माने और दो दिन तक चली वार्ता विफल हो गयी तो पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने धावा बोल दिया और सभी 33 आतंकवादियों को मार गिराया।

अभी पिछले सप्ताह ही भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान को याद दिलाया था कि सांप को पालने वाले को यह नहीं सोचना चाहिए कि वह उसके पड़ोसी को ही काटेगा। सांप पाला है तो वह आपको भी काट सकता है। पाकिस्तान ने जो आतंकवाद रूपी सांप पाला है वह भारत को तो परेशान करता ही है लेकिन अब वह खुद पाकिस्तान को भी काटने लगा है। पाकिस्तान के अशांत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में आतंकवाद-रोधी केंद्र में प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के आतंकवादियों ने कुछ लोगों को बंधक बना लिया। पाकिस्तान सरकार ने बातचीत के जरिये मामला सुलझाने की कोशिश की लेकिन आतंकवादी नहीं माने और दो दिन तक चली वार्ता विफल हो गयी तो पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने धावा बोल दिया और सभी 33 आतंकवादियों को मार गिराया। इस प्रकार की रिपोर्टें हैं कि बंधक संकट को समाप्त करने के लिए सरकार और टीटीपी के बीच वार्ता विफल होने के बाद शुरू किए गए बचाव अभियान में विशेष बलों के दो कमांडो भी मारे गए हैं। फिलहाल बन्नू में तो पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों को मार गिराया है लेकिन जिस तरह तालिबान ने ऐसे और हमलों की चेतावनी दी है उससे पाकिस्तान सरकार की परेशानी और बढ़ गयी है।

हम आपको यह भी बता दें कि यह मामला पाकिस्तान सरकार के लिए परेशानी का सबब बन गया था क्योंकि लोगों का आक्रोश सरकार के खिलाफ देखा जा रहा था। लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि प्रधानमंत्री और मंत्री अर्जेंटीना को फुटबाल विश्वकप जीतने के लिए तो बधाई दे रहे हैं लेकिन बन्नू हमला मामले में सब के सब चुप्पी साधे हैं। उधर, विपक्ष भी शहबाज शरीफ की सरकार को घेरते हुए कह रहा था कि वह आतंकवाद से नहीं निपट पा रही है। इस मुद्दे पर पाकिस्तान में राजनीतिक घमासान भी देखने को मिला क्योंकि संघीय सरकार इमरान खान की पार्टी के नेतृत्व वाली खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की सरकार की विफलता का मुद्दा उठा रही थी तो वहीं इमरान खान पाकिस्तान सरकार पर हमला बोल रहे थे।

बहरहाल, पूरा अभियान खत्म होने के बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पुष्टि की कि बन्नू में आतंकवाद-रोधी विभाग (सीटीडी) के केंद्र में लोगों को बंधक बनाने वाले प्रतिबंधित टीटीपी के ‘‘सभी आतंकवादी’’ पाकिस्तानी सेना के एक अभियान में मारे गए। सरकार ने बंधक संकट के समाधान के लिए आतंकवादियों के साथ बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन इसमें नाकामी के बाद पाकिस्तानी सेना के विशेष सेवा समूह (एसएसजी) के कमांडो ने परिसर पर धावा बोल दिया। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में कहा, ‘‘यह अभियान 20 दिसंबर को दोपहर साढ़े 12 बजे विशेष सेवा समूह द्वारा शुरू किया गया और सभी आतंकवादी मारे गए।’’

उन्होंने कहा कि सीटीडी परिसर में गिरफ्तार किए गए 33 आतंकवादी थे और उनमें से एक ने वहां कर्मचारी के सिर पर ईंट मारकर उसकी बंदूक छीन ली थी। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि अभियान के दौरान दो कमांडो मारे गए, जबकि एक दर्जन से अधिक घायल हो गए। ख्वाजा आसिफ ने कहा कि बचाव अभियान से पहले आतंकवादियों ने दो बंधकों की हत्या कर दी। उन्होंने कहा कि बाकी सभी बंधकों को रिहा करा लिया गया है, लेकिन उन्होंने संख्या नहीं बताई। इससे पहले पुलिस सूत्रों ने बताया था कि करीब 24 अधिकारियों को बंधक बनाया गया। उन्होंने कहा कि दोपहर ढाई बजे तक पूरे सीटीडी परिसर पर नियंत्रण बना लिया गया। इससे पहले अधिकारियों ने बताया कि 15 मिनट के अभियान में सभी आतंकवादी मारे गए।

हम आपको बता दें कि मंगलवार को टेलीविजन पर प्रसारित फुटेज में सीटीडी परिसर से धुएं का गुबार उठता दिखा। यह गतिरोध तब शुरू हुआ, जब सीटीडी ने रविवार को कुछ आतंकवादियों को गिरफ्तार किया तथा उनसे पुलिस थाने में पूछताछ की जा रही थी। तभी, इनमें से एक आतंकवादी ने रविवार को पुलिसकर्मी से एके-47 राइफल छीन ली और गोलियां चलानी शुरू कर दी। उस आतंकवादी ने इमारत में रखे गये अन्य आतंकवादियों को मुक्त कराया और उन्होंने परिसर को अपने कब्जे में ले लिया। उन्होंने कई पुलिसकर्मियों को बंधक बना लिया। टीटीपी ने अपने आतंकियों के लिए दक्षिण या उत्तरी वजीरिस्तान के कबायली जिलों में सुरक्षित मार्ग की मांग की।

हम आपको यह भी बता दें कि बन्नू में मंगलवार को स्थिति तनावपूर्ण थी, क्योंकि जहां यह केंद्र स्थित है वहां पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने चारों तरफ से छावनी क्षेत्र की घेराबंदी कर दी थी। इलाके के निवासियों को घरों के अंदर ही रहने के लिए कहा गया था। स्कूल, कॉलेज भी बंद कर दिए गए थे। क्षेत्र में मोबाइल फोन सेवाएं भी रोक दी गईं थीं।

उधर, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खैबर पख्तूनख्वा में इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी की नेतृत्व वाली सरकार पर हमला करते हुए कहा, ‘‘कई समूहों के साथ जुड़ाव वाले 33 (आतंकवादियों) को हिरासत में लिया गया था। लेकिन प्रांतीय सरकार सीटीडी परिसर पर कब्जा के संबंध में अपनी जिम्मेदारी में पूरी तरह से विफल रही। आसिफ ने अभियान के लिए सेना को श्रेय देते हुए कहा कि प्रांतीय सरकार की इसमें ‘‘कोई भूमिका नहीं’’ थी।

हम आपको बता दें कि सोमवार को, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के एक प्रवक्ता मुहम्मद खुरासानी ने कहा कि सीटीडी पुलिस थाने में कैदियों के साथ सुरक्षा अधिकारियों के अमानवीय व्यवहार के कारण यह कदम उठाया गया। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में कई आतंकवादी संगठनों के अग्रणी समूह के रूप में स्थापित टीटीपी ने पिछले महीने जून में संघीय सरकार के साथ हुए संघर्ष विराम समझौते को रद्द कर दिया और अपने आतंकियों को देश भर में आतंकवादी हमले करने का आदेश दिया था। अल-कायदा का करीबी माने जाने वाले इस आतंकी संगठन को पाकिस्तान में कई घातक हमलों के लिए दोषी ठहराया गया है, जिसमें 2009 में सेना मुख्यालय पर हमला, सैन्य ठिकानों पर हमले और 2008 में इस्लामाबाद में मैरियट होटल में बमबारी शामिल है।

उधर, एक और घटना में, देर रात खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में कम से कम 50 आतंकवादी एक पुलिस थाने में घुस गए और एक पुलिस कांस्टेबल को घायल कर दिया। यह घटना दक्षिण वजीरिस्तान के कबायली जिले के वाना में देर रात एक बजे हुई। जिले के मुख्य पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘‘50 से अधिक आतंकवादी पुलिस स्टेशन में घुस गए और गोलियां चलाईं, जिसमें एक कांस्टेबल घायल हो गया। वे गोला-बारूद, हथियार और अन्य उपकरण ले गए।’’ जवाबी गोलीबारी में एक आतंकी मारा गया। पुलिस ने कहा कि बाकी आतंकी भाग गए और उन्हें पकड़ने के लिए तलाश अभियान जारी है।



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